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ऑपरेशन में लापरवाही से हुई महिला की मौत पर डॉक्टर पर हुई एफआईआर दर्ज,FIR filed against doctor for woman's death due to negligence during operation.

ऑपरेशन में लापरवाही से हुई महिला की मौत पर डॉक्टर पर हुई एफआईआर दर्ज 

•बिना जांच कर दिया किडनी का ऑपरेशन

•इंफेक्शन से काटने पड़े थे पैर 

•ऑपरेशन के बाद हो गई थी महिला की मौत 

•डॉक्टर पर लगा है लापरवाही का आरोप

Source:Social Media 

खण्डवा (मप्र)- खंडवा पुलिस ने सेंट रिचर्ड पम्पुरी अस्पताल के डॉ. शेख वाजिद पर केस दर्ज किया है। डॉक्टर पर एक महिला मरीज के किडनी के ऑपरेशन में लापरवाही बरतने का आरोप लगा है, जिससे उसकी मौत हो गई। महिला के परिजनों ने कलेक्टर ऋषभ गुप्ता से मामले की शिकायत की थी। मामले में सीएमएचओ ने जांच टीम बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट में लापरवाही सामने आई है। बताया गया है कि आरोपी पर धारा 106 (1) (लापरवाही से किसी की मौत हो जाना) के तहत केस दर्ज किया गया जिसमें आरोपी को अधिकतम 5 साल की कैद और जुर्माने की सजा हाे सकती है। सीएमएचओ डॉ. ओपी जुगतावत ने बताया, मामले में डॉक्टर के इलाज संबंधी जांच की गई थी। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन पर किसी प्रकार से कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं हैं।

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ऑपरेशन के बाद ज्योति के पैरों पर उभरे काले धब्बे 

    ऑपरेशन के बाद ज्योति के पैरों पर काले धब्बे उभर आए थे। बाद में डॉक्टरों ने पैर काट दिए थे। ऑपरेशन से पहले जरूरी टेस्ट नहीं कराए जांच टीम के मुताबिक, किडनी ऑपरेशन से पहले खून में कई चीजों की जांच जरूरी हुहोती है। इससे मरीज की किडनी की स्थिति का पता चलता है। इससे ऑपरेशन के दौरान होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार किडनी ऑपरेशन से पहले पेशाब में प्रोटीन और खून की मात्रा की जांच जरूरी होती है। साथ ही किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है, यह भी जांचा जाता है। इन जांचों में से कोई एक भी छूट जाए तो मरीज के शरीर में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। चिनाई रोजड़ी की रहने वाली ज्योति ओसवाल के मामले में भी यही हुआ है। जरूरी जांचें न होने के कारण ऑपरेशन के बाद ज्योति के शरीर में संक्रमण फैल गया, जिससे उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजन ने पम्पुरी अस्पताल में तोड़फोड़ की थी। 

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किडनी की बीमारी के चलते एडमिट हुई थी 

        प्राप्त जानकारी के अनुसार 21 मई को ज्योति को किडनी की समस्या के चलते पम्पुरी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। तबीयत बिगड़ने पर उसे इंदौर रेफर कर दिया गया था। 16 जून को इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। इसके बाद परिजन पम्पुरी हॉस्पिटल पहुंचे और हंगामा कर दिया। महिला की मौत के बाद परिजन ने हंगामा कर दिया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन ने अस्पताल में तोड़फोड़ की। लाठी-डंडों से कांच भी फोड़ दिए। एसडीएम बजरंग बहादुर, सीएसपी अभिनव बारंगे और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अफसरों ने परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। तोड़फोड़ के बाद पम्पुरी अस्पताल में हर तरफ कांच के टुकड़े बिखरे पड़े थे।

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चार दिन में ठीक हो जाएगी - डॉक्टर 

      ज्योति के पति मनोज ओसवाल ने बताया कि पत्नी किडनी का इलाज करवाने पम्पुरी अस्पताल गई थी। यहां डॉक्टर वाजिद खान ने उसका चेकअप किया था। डॉक्टर ने कहा था कि चार दिन में वह ठीक हो जाएगी। 22 मई को दोपहर में 3.30 बजे ऑपरेशन के लिए उसे ले गए। रात 8.30 बजे ऑपरेशन रूम से बाहर लेकर आए। पत्नी कहने लगी कि मेरे पैर काम नहीं कर रहे हैं। हमने डॉक्टर को बताया तो उसने कहा कि दर्द की वजह से वह ऐसा बोल रही है। 

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तबियत बिगड़ी तो कर दिया इंदौर रेफर 

    मनोज ने बताया कि ऑपरेशन के कुछ देर बाद पत्नी के पैरों पर काले धब्बे उभर आए। इसके बाद डॉक्टर ने एक जांच करवाई और इंजेक्शन दिया, लेकिन तबियत बिगड़ती जा रही थी। तब डॉ. खान ने कहा कि पत्नी को इंदौर ले जाओ, मेरी बात हो गई है। इंदौर के अरविंदो अस्पताल में भर्ती कर दो। यहां भर्ती रहने के 8 दिन बाद पत्नी ज्योति के दोनों पैर काटने पड़े और इसके 8 दिन बाद ज्योति की मौत हो गई। परिजन के हंगामे के दौरान अस्पताल के बाहर भीड़ जमा हो गई थी।

डॉक्टर वाजिद शेख का प्राइवेट क्लिनिक भी हो गया बंद

5 लाख की लिमिट खत्म होने पर लिया कर्ज 

     ज्योति के परिजनों ने बताया कि उनके पास आयुष्मान कार्ड था लेकिन पम्पुरी हॉस्पिटल में लगभग 50 हजार रुपए कई जांचों के नाम पर ले लिए गए। वहीं अरविंदो हॉस्पिटल में भी 25 दिन में करीब 1 लाख 50 हजार रुपए इलाज में खर्च हो गए। हमारी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। हम पम्पुरी हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज समझकर गए थे। डॉक्टर ने पर्ची पर साइन करवा लिए और बोले कि आप जिस इलाज के लिए आए हो वो मुफ्त में नहीं होता। ऑपरेशन के बाद ज्योति की हालत बिगड़ गई तो पम्पुरी हॉस्पिटल से बोला गया कि अरविंदो ले जाओ हमारी पहचान के डॉक्टर हैं। बेहतर इलाज करेंगे और सब मुफ्त में होगा, लेकिन वहां भी आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद डेढ़ लाख रुपए खर्च हो गए। आयुष्मान योजना में पांच लाख रुपए की लिमिट खत्म हो गई तो हमने दो लाख रुपए कर्ज लेकर इलाज में खर्च किए थे।

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आयुष्मान योजना रद्द करने की सिफारिश 

          आयुष्मान योजना प्रभारी डॉक्टर रश्मि कौशल ने बताया, पम्पुरी अस्पताल की आयुष्मान योजना रद्द करने की सिफारिश भोपाल भेजी गई है। अस्पताल में आयुष्मान योजना के मरीजों को न तो पूरी जानकारी दी जाती है और न ही उचित इलाज किया जाता है। निजी अस्पतालों में आयुष्मान मित्र नियुक्त किए गए हैं, जिनका काम मरीजों को योजना की विस्तृत जानकारी देना है, लेकिन वहां यह भी नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भोपाल भेजी गई है, जिस पर जल्द कार्रवाई की उम्मीद है।

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