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गबन, ऑडिट ऑफिस में पौने सात करोड़ का, एक क्लर्क ने बढ़ा ली खुद ही की तनख्वाह Embezzlement of Rs. 7.25 crore in audit office, a clerk increased his own salary.

गबन, ऑडिट ऑफिस में पौने सात करोड़ का लिपिक ने बढ़ा ली खुद की तनख्वाह 

•क्लर्क ने बढ़ा ली खुद की तनख्वाह 

•बिल और वेतन में जालसाजी कर करोड़ों का घोटाला

•ऑडिट ऑफिस में पौने सात करोड़ का गबन

•क्लर्क ने शासन की विभिन्न योजना राशि में किया फर्जीवाड़ा 

•आरोपी ने बढ़ा लिया था अपना मूल वेतन 

•प्रतिमाह शासन के खाते से लिया अधिक वेतन 

•पुलिस ने शुरू कर दी है मामले की जांच 

•आरोपियों के खिलाफ की जा रही है कार्रवाई

Source:Social Media (सांकेतिक)

    ऑडिट ऑफिस में पौने सात करोड़ रुपए के गबन का मामला प्रकाश में आया है। आरोपी लिपिक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी राशि अपने स्वजन के बैंक खाते में स्थानांतरित की। आरोपी लिपिक सहित पांच लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

जबलपुर(एमपी)(Jabalpur Audit Office)। स्थानीय निधि संपरीक्षा (लोकल फंड आडिट) के क्षेत्रीय कार्यालय में पौने सात करोड़ रुपए के गबन के मामले में लिपिक संदीप शर्मा सहित पांच पर आपराधिक मामला पंजीबद्ध किया गया है। आरोपी लिपिक, क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ था, उसके पास पे रोल जनरेशन और कर्मचारियों के बिल बनाने का उत्तरदायित्व था। इस जिम्मेदारी की आड़ में आरोपी ने धांधली करते हुए सरकारी राशि अपने स्वजन के बैंक खाते में स्थानांतरित की, साथ ही बिल और वेतन की जालसाजी में आरोपी ने लगभग पौने सात करोड़ रुपए की सरकारी राशि का गबन किया है।

Source:Social Media (सांकेतिक)

कहां हुआ मामला दर्ज और कौन-कौन है शामिल?

    इस गबन के मामले में गुरुवार को जबलपुर के ओमती थाने में लिपिक संदीप व अन्य आरोपियों के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध किया गया है, जिनमें भोपाल स्थित संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा सतपुड़ा भवन कार्यालय में पदस्थ मनोज बौरिया, प्रिया विश्नोई, सीमा अमित तिवारी व अनूप कुमार हैं । फिलहाल ये सभी फरार हैं।

फर्जीवाड़ा किया कैसे?

      आरोपी लिपिक ने शासन की विभिन्न बीमा एवं परिवार कल्याण की योजना राशि में फर्जीवाड़ा किया है। सरकारी राशि हड़पने के लिए ऐसे व्यक्ति को, जो कभी शासकीय सेवा में ही नहीं थे, उन्हें मृत घोषित कर उनके रिकार्ड में फर्जी नॉमिनी बनाकर रुपए निकाले गए। धांधली में लिपिक ने जाली कर्मचारी कोड और नंबर बनाया ,जाली हस्ताक्षर भी किए।

कई गुना बढ़ा लिया अपना वेतन 

         आरोपी लिपिक ने जालसाजी करते हुए अपना मूल वेतन भी बढ़ा लिया। विभागीय जांच में पता चला कि आरोपी लिपिक का वेतन 32 से 34 हजार के रुपए था, जिसे उसने सॉफ्टवेयर में बढ़ा लिया। प्रतिमाह शासन के खाते से मूल वेतन के अपेक्षाकृत कई गुना अधिक वेतन राशि का वो आहरण कर रहा था। ऐसा करके उसने लगभग 56 लाख 58 हजार रुपए की राशि का गबन किया। इसके अतिरिक्त लगभग 95 लाख 23 हजार रुपए का अन्य अनधिकृत भुगतान आरोपी के पक्ष में होना पाया गया है। इसके साथ ही साथ आरोपी ने शासन की राशि हड़पने के लिए प्रतीक शर्मा के नाम पर एक फर्जी कर्मचारी कोड भी जनरेट किया। उसका पेन नंबर भी बनाया। उसे क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ होना बताकर जालसाजी करते हुए उसके नाम पर 10 लाख 73 हजार रुपए दूसरे बैंक में भेज दिए, जिसे बाद में उसने स्वयं प्राप्त कर लिया।

Source:Social Media (सांकेतिक)

कूट रचित शासकीय अभिलेख किए तैयार

     कूट रचित शासकीय अभिलेख तैयार किए गए। महंगाई भत्ते के एरियर की गणना में अपने परिचित कर्मचारियों को अवैध तरीके से आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ अनूप कुमार बौरिया, आरोपी लिपिक का नजदीकी था। उसे करीब 28 हजार रुपये डीए ,एरियर राशि स्वीकृत हुआ था।

इनके खातों में भेजी गई सरकारी राशि 

     विभागीय जांच में सामने आया कि आरोपी लिपिक ने शासन की गबन राशि को प्रियांशु शर्मा, शैरान अर्पित हैरिसन, शालोम विवियन गिल, अनिकेत विश्वकर्मा, प्रतीक शर्मा, पुनीता, आशीष विश्वकर्मा, मोहम्मद रियाज, कविता शर्मा, स्वाति शर्मा, दिलीप कुमार विश्वकर्मा, पुष्पा देवी शर्मा, शुभम शर्मा, विनय कुमार, रूखसार परवीन, शिवम शर्मा, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद शरीक, मोहम्मद उबेदुल्ला,  काशिफ आजमी, अनीशा शर्मा, दत्तराय सरवन, पूनम शर्मा, केके शर्मा, श्वेता शर्मा, कृतिका, विकास कुमार, अनीता, आकांक्षा, सुष्मिता सरवन, अनिल कुमार मिश्रा, अनिल कुमार मरावी, जया पासी, मेनका नाम के बैंक खाताधारकों के नाम पर स्थानांतरित किया है। पुलिस अब इन खातों और उनसे संबंधितों की जानकारी जुटा रही है।

करवा दिया डीए के एरियर भुगतान  

     आरोपी लिपिक ने सॉफ्टवेयर में फर्जी जानकारी फीड करते हुए अनूप के लिए दो लाख 53 हजार रुपए डीए का एरियर भुगतान करवा दिया। आरोपी ने अर्जित अवकाश समर्पण और समूह बीमा योजना का चार करोड़ 69 लाख 82 हजार 551 रुपए और परिवार कल्याण निधि का 57 लाख 87 हजार 479 रुपए का भुगतान, अपने और स्वजन के बैंक खाते में भेज दिया। 

     अब पुलिस की एवं विभागीय कार्रवाई जारी है जिसमें सारे तथ्य सामने आ जाएंगे ।

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