3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मनाई जाएगी इस वर्ष शारदीय नवरात्रि, This year Sharadiya Navratri will be celebrated from 3rd October to 12th October.
3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मनाई जाएगी इस वर्ष शारदीय नवरात्रि
इस वर्ष कब से कब तक है शारदीय नवरात्रि?
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। गुरुवार 3 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि उत्सव की शुरुआत होगी। प्रथम दिवस नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना और माता शैलपुत्री की पूजा से होगी। शनिवार 12 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ ही दशहरा उत्सव मनाया जाएगा।
किसको समर्पित है शारदीय नवरात्रि?
नवरात्रि उत्सव, देवी शक्ति को समर्पित है, जो दिव्य शक्ति का रूप है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के नौ अवतारों में से एक अवतार से जुड़ा हुआ है और प्रत्येक रूप देवी की एक अनूठी विशेषता का प्रतिनिधित्व भी करता है, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाता है। इस आयोजन में पूजा, व्रत, रात्रि जागरण, कन्या पूजन और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अन्य अनुष्ठानों की एक श्रृंखला शामिल होती है।
आखिर क्या है शारदीय नवरात्रि?
शारदीय नवरात्रि को महानवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है, जो अश्विन के चंद्र महीने में मनाई जाती है और शरद ऋतु के मौसम में आती है, इसलिए इसे "शारदीय नवरात्रि" नाम दिया गया है। हिंदू कैलेंडर में मनाए जाने वाले सभी नवरात्रियों में यह नवरात्रि सबसे अधिक महत्व रखती है और प्रतिवर्ष सितंबर या अक्टूबर माह में मनाई जाती है।
इस शारदीय नवरात्रि के तिथि और समय
3 अक्टूबर को सुबह 6:30 बजे शुभ घटस्थापना का मुहूर्त है जो सुबह 7:31 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे शुरू होकर 12:51 बजे तक रहेगा।
क्या हैं 9 माताओं के नाम ?
नवरात्रि में क्रम से पहले दिन माता शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री हैं। फिर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की परंपरा रहती है। नवरात्रि में 9 दिनों के साथ 9 रंगों का भी महत्व होता है, इसलिए उसके अनुसार ही परिधान भी धारण किए जाते हैं।
आराधना है देवी को समर्पित
नवरात्रि का अर्थ है 'नौ रातें', जो अमावस्या के अगले दिन से शुरू होती है। चंद्र चक्र के पहले नौ दिन स्त्रीलिंग माने जाते हैं, जो देवी, ईश्वर के स्त्री रूप का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। नौवां दिन नवमी के रूप में जाना जाता है। नवमी तक की सभी पूजा इसी चरण के दौरान देवी को समर्पित होती है।
जय माता दी





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