मध्यप्रदेश की पहली गोशाला,जहां गोबर से प्रतिदिन बनेगी 2 टन सीएनजी, Madhya Pradesh's first cowshed, where 2 tons of CNG will be made daily from cow dung.
प्रदेश की पहली गोशाला जहां गोबर से प्रतिदिन 2 टन बनेगी सीएनजी जब संतों ने संभाली निगम की गोशाला तो जुड़ते ही चले गए लोग
क्या है योजना ?
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में गायों के गोबर से बायोगैस का उत्पादन शुरू होने जा रहा है। यह मप्र की पहली ऐसी गोशाला होगी जहां रोज दो टन बायो सीएनजी तैयार होगी। इसके लिए प्रतिदिन 100 टन गोबर का उपयोग किया जाएगा। नगर निगम के साथ साथ आम लोग भी इस सीएनजी का इस्तेमाल कर सकेंगे।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने 31 करोड़ की लागत से 10 बीघा जमीन पर यह प्लांट बनाया है, जो अगले तीन महीने में निगम को सौंप दिया जाएगा। इस गोशाला में वर्तमान में करीब दस हजार गायें हैं, जिसका पूरा प्रबंधन हरिद्वार से आए संत और निगम के अधिकारी कर रहे हैं। वर्तमान में इंदौर में भी एक बायो सीएनजी प्लांट है, लेकिन वहां गीले कचरे से गैस बनाई जा रही है।
गोवंश बढ़ने पर उसके प्रबंधन पर बढ़ाया ध्यान
गोशाला में जैसे-जैसे गोवंश बढ़ता गया, उसके मैनेजमेंट और गोबर के इस्तेमाल पर प्रबंधन ने अपना ध्यान बढ़ाया। पहले गोबर से गो कास्ट का निर्माण शुरू हुआ, जिसे मुक्तिधामों में पहुंचाया गया। इस गो कास्ट को देखकर प्रदेश के दूसरे शहरों में भी गो-कास्ट बनने लगी। फिर गाय के दूध की शहर में बिक्री, गणपति प्रतिमा,गोनाइल आदि प्रोडक्ट का निर्माण गोशाला में शुरू किया गया।
क्या होगा फायदा ?
इस बायो सीएनजी प्लांट के सफल होने पर प्रदेश में नई राह भी खुल सकती है जिससे बेरोजगारी एवं आवारा पशुओं को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
अब देखते हैं आगे क्या होता है?






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