पेट्रोल-डीजल के दामों की समीक्षा की हो रही है तैयारी,Now preparations have been made to review the prices of petrol and diesel.
पेट्रोल-डीजल के दामों की समीक्षा की हो रही है तैयारी कम भी हो सकते हैं दाम
नई दिल्ली - उपभोक्ताओं तक कच्चे तेल के दामों में कमी का लाभ पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार अब हर तीसरे महीने कीमतों की समीक्षा करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क या राज्य वैट में कमी को नए नियमों से अलग रखा जा सकता है। इसका मतलब कंपनियों की ओर से मुनाफे पर 10% का लाभ उपभोक्ताओं को देने के अलावा, उपभोक्ताओं को केंद्र व राज्य सरकार अपने शुल्क में भी कटौती कर अतिरिक्त राहत भी दे सकती हैं।
क्या बन रही है योजना?
अगर सूत्रों की मानें तो कीमतों की समीक्षा की समय सीमा तीन महीने करने का मतलब, कीमतों को नए सिरे से निर्धारित करने के बाद दामों में तीन महीने तक बदलाव नहीं किया जाएगा। अभी कंपनियों को पेट्रोल पर शुद्ध लाभ करीब 15 रुपए प्रति लीटर है। 10% लाभ उपभोक्ता ब्रैकेट में डालने पर उपभोक्ता को पेट्रोल पर 1 रु.50 पैसे और डीजल पर 1 रु. 20 पैसे का लाभ हो सकता है। तीन महीने की समीक्षा के बाद कंपनियों के लाभ का आकलन कर कीमतें पुनः निर्धारित होंगी। कच्चे तेल की कीमतों में ग्लोबल वृद्धि पर एक अधिकारी ने बताया कि क्रूड ऑयल का बेंचमार्क 85 डॉलर प्रति बैरल का है, इससे ज्यादा होने पर दाम बढ़ भी सकते हैं।
पिछली सरकार में क्या हुआ था?
डीजल और पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने के लिए 2010 और 2014 में संशोधन भी हुआ था। पहले 15 दिनों में कीमतों की समीक्षा का प्रावधान किया गया था। 2017 के बाद दैनिक रूप से समीक्षा शुरू कर दी गई थी। अब नए सिरे से नियमों में बदलाव करने की तैयारी की जा रही है।
क्रूड ऑयल की कीमत में कमी पर भी नहीं मिल रही राहत
पिछले करीब छह महीने में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 19% तक की कमी आई है, लेकिन उपभोक्ताओं को इसका लाभ पूरी तरह से नहीं मिल सका है। एक रुपए प्रति बैरल की कमी होने पर सरकार को सालाना लगभग 13 हजार करोड़ रुपए की बचत होती है। अब समीक्षा के बाद उपभोक्ता को लाभ देने की तैयारी की जा रही है।
अब आगे देखते हैं क्या होता है?





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