संसद सत्र आज से,अगले 10 दिनों में स्पीकर का चुनाव,सरकार का बहुमत साबित करना और पीएम का होगा भाषण, Parliament session from today, Speaker's election in the next 10 days, government's majority to be proved and PM's speech.
संसद सत्र आज से अगले 10 दिनों में स्पीकर का चुनाव सरकार का बहुमत साबित करना पीएम का होगा भाषण साथ ही हंगामे के भी हैं आसार
गत 9 जून को पीएम नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार शपथ लेने के साथ ही 18वीं लोकसभा का कामकाज शुरू हो गया है। इस लोकसभा का पहला सत्र 24 जून यानि आज से शुरू होगा और 3 जुलाई तक चलेगा। इन 10 दिन में कुल 8 बैठकें (29-30 जून को छुट्टी) होनी हैं। सर्वप्रथम प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि माहताब राष्ट्रपति भवन जाकर शपथ लेंगे। उसके बाद वे सुबह 11 बजे लोकसभा पहुंचेंगे। शुरुआत के दो दिन 24 और 25 जून को प्रोटेम स्पीकर नए सांसदों को शपथ दिलाएंगे। फिर 26 जून को लोकसभा स्पीकर का चुनाव होगा।
10 साल बाद पीएम के सामने होगा मजबूत विपक्ष
पिछले हफ्ते NEET परीक्षा की गड़बड़ी, तीन क्रिमिनल लॉ, लोकसभा चुनाव के बाद शेयर बाजार में हुई गड़बड़ी आदि के आरोपों पर विपक्ष इस बार हंगामा बरपा सकता है।
27 जून को राज्यसभा का 264वां सत्र शुरू होगा। उसी दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा-राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबाधित करेंगी जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी बोलेंगे। सत्र के आखिरी दो दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सरकार धन्यवाद प्रस्ताव लाएगी और दोनों सदनों में चर्चा की जाएगी।
लगातार 2 बार से भाजपा सांसद बन रहे हैं प्रोटेम स्पीकर
2019 वीरेंद्र कुमार खटीक,उम्र - 65 साल,पार्टी - बीजेपी,7 बार के सांसद,प्रोटेम स्पीकर बने थे।
2024 भर्तृहरि माहताब,उम्र - 66 साल,पार्टी - बीजेपी,7 बार के सांसद, इस बार प्रोटेम स्पीकर बनेंगे।
प्रोटेम स्पीकर क्यों और कब तक ?
1. स्पीकर का पद नई लोकसभा की पहली बैठक के ठीक पहले खाली हो जाता है। लोकसभा की कार्यवाही चलाने के लिए राष्ट्रपति प्रोटेम स्पीकर चुनते हैं।
2. प्रोटेम स्पीकर लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हैं। आमतौर पर सदन के वरिष्ठतम सदस्य (चुनाव में जीत के आधार पर) को इस पद पर नियुक्त किया जाता है।
3. प्रोटेम स्पीकर सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति के सामने शपथ लेते हैं। फिर नए सांसदों को शपथ दिलाते हैं। वह स्थायी रूप से संसद चलाते हैं। नए स्पीकर के चुनाव के साथ ही उनकी सेवा समाप्त हो जाती है।
4. इस बार BJP के ओडिशा से लगातार 7 बार के सांसद भर्तृहरि माहताब प्रोटेम स्पीकर बने हैं। कांग्रेस ने अपने 8 बार के सांसद कोडिकुन्निल सुरेश को स्पीकर बनाने की मांग की थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के सांसद लगातार नहीं जीते हैं, इसलिए उनकी वरिष्ठता का आधार नहीं बनता है।
5. प्रोटेम स्पीकर की सहायता के लिए 5 सांसदों को राष्ट्रपति ने पीठासीन अधिकारी बनाया है। इनमें के. सुरेश (कांग्रेस), सुदीप बंदोपाध्याय (TMC), टीआर बालू (DMK) और BJP से राधा मोहन सिंह, फग्गन सिंह कुलस्ते के नाम शामिल हैं। विपक्ष के तीनों सांसदों ने 22 जून को प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के विरोध में अपना नाम वापस ले लिया।
26 जून को लोकसभा स्पीकर का होगा चुनाव
भाजपा की (17-18) जून को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के घर मंत्रियों की बैठक हुई। जिसमें लोकसभा स्पीकर को लेकर भी चर्चा हुई। भाजपा चाहती है कि स्पीकर उनकी पार्टी का हो। बीजेपी ओम बिड़ला को दूसरी बार स्पीकर बना सकती है। राजस्थान के कोटा से सांसद बिड़ला पिछली बार भी लोकसभा अध्यक्ष थे।
NDA में भाजपा के सहयोगी दल जेडीयू और टीडीपी के बीच स्पीकर पद को लेकर मांग उठी थी। बाद में जेडीयू ने घोषणा कर दी है कि वह भाजपा के किसी भी फैसले का समर्थन करेगी। टीडीपी ने एनडीए उम्मीदवार की वकालत की है। यानी अभी खुलकर कुछ भी कहने से परहेज किया है।
विपक्ष के INDIA गठबंधन इस बार डिप्टी स्पीकर पद की मांग करेगा। चर्चा है कि अगर विपक्ष को डिप्टी स्पीकर पद नहीं मिलता है तो विपक्षी गठबंधन स्पीकर पद के लिए अपना उम्मीदवार उतारेगा। डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परम्परा रही है। 16वीं लोकसभा में NDA में शामिल रहे अन्नाद्रमुक के थंबीदुरई को यह पद दिया गया था। जबकि, 17वीं लोकसभा में यह पद खाली रहा था।
भाजपा स्पीकर पद पर सहमति के लिए विपक्ष को अपने कैंडिडेट का नाम प्रस्तावित करेगी। अगर विपक्ष सहमत नहीं हुआ तो अपना उम्मीदवार उतारेगा। ऐसी परिस्थिति में स्पीकर के लिए चुनाव करना पड़ेगा।
1. जेल में बंद नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को शपथ लेने के लिए पैरोल दी जाती है। इसके लिए संसद सचिवालय की तरफ से पहले जेल प्रशासन को सूचना देनी पड़ती है। जिसमें बताया जाता है कि शपथ लेने वाला सांसद आपकी जेल में बंद है, उसे संसद में आकर शपथ लेने की परमीशन दी जाए।
2. शपथ लेने के बाद सांसद वापस जेल चले जाते हैं। उनको लिखित में स्पीकर को जानकारी देनी होती है कि वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
27 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा में सुबह 11 बजे अभिभाषण देंगी। इसमें केंद्र सरकार के अगले 5 साल के कार्यक्रम का रोडमैप पेश करेंगी। 17वीं लोकसभा में तब के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोनों सदन को 1 घंटे तक संबोधित किया था। इसी दिन राज्यसभा का 264वां सत्र शुरू हो जाएगा। इस साल 15 राज्यों की 56 राज्यसभा सीटें खाली हुईं थीं। जिनमें 41 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीत गए हैं। वहीं फरवरी में 15 सीटों पर हुई वोटिंग में यूपी की 8 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की, सपा को दो सीट मिलीं। कर्नाटक में कांग्रेस को 3, भाजपा को 1 मिली थी। वहीं हिमाचल की एक सीट भी भाजपा के खाते में आई थी।
राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद संसद के दोनों सदनों में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी। विपक्ष नीट परीक्षा गड़बड़ी, यूजीसी नेट एग्जाम कैंसिलेशन और अग्निवीर योजना को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। इसके बाद प्रधानमंत्री संसद के दोनों सदनों में, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देंगे।
सत्र 40 दिन छोटा होगा
17वीं लोकसभा की तुलना में 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 40 दिन छोटा है। 2019 में नरेंद्र मोदी ने 30 मई को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और 17 जून को संसद का पहला सत्र शुरू हो गया था। हालांकि, उसमें नई सरकार का बजट सत्र भी शामिल था। जबकि इस बार 9 जून को प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण हुआ और पहला सत्र 15 दिन बाद आज से शुरू हो रहा है।
18वीं लोकसभा में इस बार नेता प्रतिपक्ष भी होगा। नेता प्रतिपक्ष का पद पिछले 10 साल से लोकसभा में खाली पड़ा है, क्योंकि 2014 के बाद से किसी विपक्षी दल के 10% यानि 54 सांसद नहीं जीते। मावलंकर नियम के तहत नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए लोकसभा की कुल संख्या 543 का 10% यानी 54 सांसद होना आवश्यक है।
16वीं लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे 44 सांसद वाले कांग्रेस संसदीय दल के नेता थे, लेकिन उन्हें नेता प्रतिपक्ष (LOP) का दर्जा नहीं मिला था। 17वीं लोकसभा में कांग्रेस के 52 सांसदों की अगुआई अधीर रंजन चौधरी ने की थी। उन्हें भी कैबिनेट जैसे अधिकार नहीं मिले थे।
कांग्रेस है 99+1=100
पीएम मोदी के पिछले दो कार्यकाल की तुलना में इस बार (तीसरे टर्म में) विपक्ष मजबूत हुआ है। INDIA गठबंधन ने 234 सीटें हासिल की हैं। कांग्रेस के पास 99 सीटें हैं, जो सदन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। महाराष्ट्र के सांगली से निर्दलीय चुनाव जीते विशाल पाटिल के कांग्रेस में शामिल हो जाने से पार्टी की कुल संख्या 100 हो गई है।
नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष को हर बड़ी नियुक्ति में शामिल सदन के नेता (PM) के बराबर ही तरजीह मिलती है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली कमेटी में भी उन्हें शामिल किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। नेता प्रतिपक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, सीवीसी और सीबीआई के प्रमुखों की नियुक्ति करने वाली कमेटी में भी शामिल हो जाता है।लोकसभा की लोक लेखा समिति का अध्यक्ष भी आमतौर पर नेता प्रतिपक्ष को ही बनाया जाता है। इस समिति के पास PM तक को बुलाने का अधिकार होता है। सदन के भीतर प्रतिपक्ष के अगली और दूसरी कतार में कौन नेता बैठेगा ? इसकी राय भी विपक्ष के नेता से ही ली जाती है।


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