फैक्ट्री के धुएं से हो रही आंखों में जलन,सांस की बीमारी, ग्रामीण बोले; फैक्टरी बंद करो,Factory smoke is causing eye irritation and respiratory problems, villagers said; close the factory
फैक्ट्री के धुएं से हो रही आंखों में जलन सांस की बीमारी ग्रामीण बोले; फैक्टरी बंद करो
एमपी के सागर जिलांतर्गत बंडा विधानसभा क्षेत्र के सौरई गांव में मध्यभारत एग्रो प्रोडक्टस लिमिटेड की फैक्ट्री से लोगों का जीवन नर्क बन गया है। फैक्ट्री से उठने वाले धुएं और धूल से पानी प्रदूषित हो रहा है। खेतों में लगी फसलें बर्बाद हो रही हैं। आसपास लगे पेड़ भी प्रदूषण के शिकार होकर मुरझा रहे हैं। स्थिति यह है कि खेतों में बने कुछ कुओं का पानी सफेद हो गया है तो कुछ का पानी हरा पड़ गया है।
सागर में ग्रामीण बोले-पानी खराब हो रहा, फसलें मुरझा रहीं; पेड़ भी सूखे
किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री के रासायनिक प्रदूषण से फसलें बर्बाद हो रही हैं। जिस खेत में 80-90 क्विंटल उत्पादन होता था, वहां फिलहाल 30-35 क्विंटल ही फसल हो पा रही है। प्रशासन से कई बार शिकायत की गई लेकिन अब तक कोई निराकरण नहीं किया गया है। जल्द ही ग्रामीण फैक्ट्री के खिलाफ आंदोलन करेंगे।
बंद करो, बंद करो सौरई फैक्टरी बंद करो !
प्रतिष्ठित अखबार समूह दैनिक भास्कर ने ग्राम सौरई पहुंचकर किए गए अपने सर्वे में देखा गया तो फैक्ट्री से करीब 300 मीटर दूर तक रासायनिक गंध आ रही थी। यहां कुछ देर खड़े रहने पर घबराहट जैसी स्थिति होने लगी। आंखों में जलन की स्थिति भी बनीं।
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय सागर के अधिकारी का कहना है कि नियमों का पालन करते हुए फैक्ट्री संचालित हो रही है। साथ ही कहा गया है कि, 'यदि कोई शिकायत करेगा तो जांच कराएंगे। जांच के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।'
5 हजार लोगों को घुटन और आंखों में जलन की समस्या
फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम भी ज्ञापन सौंपा है। जिसमें कहा गया है कि फैक्ट्री के प्रदूषण से सौरई, डिलाखेड़ी, फतेहपुर, मोनपुर, कंदारी, पनारी, काटी, सलैया, हनौता पटकुई, छापरी, झागरी, पिपरिया चौदा, बमूरा, परासिया, रीछई सागर, चौका, बिजरी, जगथर, बिजपुरी, गडर, आमलपुर, गनयारी गांवों समेत बंडा भी प्रभावित हो रहा है।यहां करीब 5 हजार लोगों को सांस संबंधी समस्या हो रही है। फैक्ट्री से निकलने वाली गंध से घुटन और आंखों में जलन होती है। ग्रामीणों ने 15 दिन में समस्याओं का निराकरण नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
पहले बेचते थे पानी, अब पीने के लिए खरीदना पड़ रहा
डिलाखेड़ी गांव के रहने वाले किसान राममिलन सिंह ठाकुर ने बताया कि लगातार हो रहे प्रदूषण से फसलें बर्बाद होने लगी हैं। पहले मैं खुद बंडा में पानी बेचता था लेकिन अब स्थिति यह है कि मुझे पीने के लिए भी बंडा से पानी खरीदना पड़ता है। फैक्ट्री से उठने वाले रासायनिक धुएं और अवशिष्ट से आसपास के क्षेत्र के जल स्त्रोत दूषित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों बेटे की आंखों की जांच कराई थी। डॉक्टर ने इंफेक्शन बताया था। फैक्ट्री के कारण बाहर ही नहीं, घरों में रहना भी मुश्किल हो रहा है।
फैक्ट्री से निकलने वाला पानी जलस्त्रोतों में पहुंच रहा है।
जांच में 75% फसल को नुकसान की पुष्टि,मुआवजा नहीं
किसान राहुल लोधी ने बताया कि 2022 में प्रदूषण बोर्ड और कृषि विभाग में फसलें खराब होने की शिकायत की थी। अधिकारियों ने मौके पर आकर निरीक्षण किया और अपनी जांच रिपोर्ट में 75 प्रतिशत नुकसान होना बताया था। लेकिन अब तक न तो प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई प्रयास किए गए हैं और न ही फसलों का नुकसान होने का मुआवजा दिया गया है।
रात में छत पर न तो बैठ पाते हैं और न सो पाते हैं
किसान राहुल ने बताया कि फैक्ट्री में दिन में एक या दो चिमनी ही चलाई जाती हैं लेकिन रात होते ही 7 चिमनी शुरू कर दी जाती हैं। धुएं से आने वाली रासायनिक गंध से लोग घरों के बाहर खड़े नहीं हो पाते हैं। वे छत पर आकर नहीं बैठ सकते हैं। यदि बैठते हैं तो उल्टियां होने लगती हैं। फैक्ट्री के प्रदूषण से कई लोगों को सांस की बीमारी हो गई है। कुछ लोग कैंसर से भी पीड़ित है।सभी संबंधित विभागों से लेकर कलेक्टर को भी मामले की शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया है।
आंखों में मिर्ची की तरह लगता है धुआं, अधिकतर लोग बीमार कल्लू अहिरवार ने बताया कि फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं जब आंखों में लगता है तो मिर्ची लगने जैसा अहसास होता है। परिवार के अधिकतर लोग बीमार हैं।
फूल बाई ने बताया कि फैक्ट्री से आने वाली गंध से सांस लेना मुश्किल होता है। घर के बोर से पानी भरने के कुछ समय बाद ही दूषित हो जाता है। हाल ही में नल-जल योजना शुरू होने के बाद पानी की किल्लत खत्म हुई है। पहले 5 किमी दूर से पानी लाना पड़ता था।
ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री के प्रदूषण के दुष्परिणाम के कारण पेड़ों में फल नहीं लगते हैं। जितने भी कुओं में पानी है, वह दूषित हो गया है। लोग इसे पीने में उपयोग नहीं कर सकते हैं।
"घर में टंकी में पानी भरकर रखते हैं, लेकिन प्रदूषण के कारण कुछ समय बाद ही पानी में कीड़े पड़ जाते हैं। रंग बदल जाता है। ऐसे में यह पानी न तो पशु पीते हैं और न ही हम लोग उपयोग कर पाते हैं। ऐसा पानी पीकर लोगों का मरना ही है।"- संजय अहिरवार, ग्रामीण सौरई
मध्यभारत एग्रो प्रोडक्टस लिमिटेड की फैक्ट्री में लो ग्रेड रॉक फास्फेट, सल्फर, जिंक, आयरन डस्ट, सल्फ्यूरिक एसिड, कॉमन साल्ट, हाइड्रोक्लोरिक एसिड जैसा कच्चा माल लाया जाता है। इनसे फैक्ट्री में सिंगल सुपर फॉस्फेट, दानेदार एसएससी, ट्रिपल सुपर फॉस्फेट, सिंथेटिक जिप्सम, फास्फोरिक एसिड, रॉक फॉस्फेट बेनिफिकेशन, सोडियम सिलिका फ्लोराइड जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं।
फॉस्फेट, जिप्सम जैसे केमिकल प्रोडक्ट बनाए जाते हैं
बंडा के सौरई गांव में करीब 23.370 हेक्टेयर भूमि पर बनी मध्यभारत एग्रो प्रोडक्ट लिमिटेड रजिस्टर्ड कंपनी है। इसका मुख्यालय राजस्थान के भीलवाड़ा में है। सागर, छतरपुर में रॉक फास्फेट अच्छी-खासी मात्रा में पाया जाता है इसलिए कंपनी ने सौरई इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्री लगाई है। इसमें केमिकल फर्टिलाइजर, रॉक फॉस्फेट और बेनिफिकेशन प्लांट लगाए गए हैं। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज ओसवाल हैं।
फैक्ट्री के एचआर हेड आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि "ग्रामीणों के प्रदूषण संबंधी आरोप निराधार हैं। फैक्ट्री का संचालन प्रदूषण विभाग और सरकारी नियमों का पालन करते हुए किया जा रहा है।"
"फैक्ट्री से प्रदूषण फैलने को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं। उससे प्रदूषण फैल रहा है तो उसकी रोकथाम होना चाहिए। ताकि जान, माल को कोई नुकसान न हो। मामले को लेकर शासन से बात करूंगा। प्रदूषण पर रोकथाम की उचित व्यवस्था कराई जाएगी।"- वीरेंद्र सिंह लोधी, क्षेत्रीय विधायक बंडा











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