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मध्यप्रदेश के 16 विश्वविद्यालय डिफॉल्टर घोषित,माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भी है शामिल,16 universities of Madhya Pradesh declared defaulters,Makhanlal Chaturvedi Journalism University is also included.

मध्यप्रदेश के 16 विश्वविद्यालय डिफॉल्टर घोषित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भी है शामिल

सांकेतिक तस्वीर:सोशल मीडिया 

• एमपी के 16 विश्वविद्यालय यूजीसी की लिस्ट में डिफॉल्टर

• डिफॉल्टर विश्वविद्यालय की सूची में 7 सरकारी हैं

• लोकपाल की नियुक्ति नहीं करने को लेकर हुए डिफॉल्टर घोषित

• माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय ने कहा कि हमने की है लोकपाल की नियुक्ति

भोपाल(एमपी):यूजीसी ने मध्य प्रदेश के 16 विश्वविद्यालय को डिफॉल्टर घोषित किया है। इसकी सूची भी यूजीसी ने जारी कर दी है। यूजीसी की सूची में मध्य प्रदेश से कुल 16 विश्वविद्यालय हैं जिनमें 7 सरकारी और 9 प्राइवेट विश्वविद्यालय हैं। बड़ी बात ये कि डिफॉल्टर सूची में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भी है। इन विश्वविद्यालयों में लोकपाल की नियुक्ति यूजीसी के गाइडलाइन के अनुसार नहीं हुई है। इसी वजह से डिफॉल्टर घोषित किया गया है।

सांकेतिक तस्वीर:सोशल मीडिया 
     मध्यप्रदेश के कुल 16 विश्वविद्यालय डिफॉल्टर, जिसमें 7 सरकारी विश्वविद्यालय शामिल 

किन सरकारी विश्वविद्यालयों के हैं नाम ?

• राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय

• म्यूजिक एंड आर्ट्स विश्वविद्यालय

• नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय

• मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस विश्वविद्यालय

• जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय

• राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

• माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय

क्या है पूरा मामला??

    यूजीसी के निर्देशानुसार सभी विश्वविद्यालय में लोकपाल की नियुक्ति जरूरी है। डिफॉल्टर लिस्ट में शामिल विश्वविद्यालय में इस मापदंड का पालन नहीं किया गया । लोकपाल, विश्वविद्यालयों में छात्रों की समस्या का समाधान करता है। हालांकि माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के वीसी ने कहा है कि हमने लोकपाल की नियुक्ति की है,इसके बारे में यूजीसी को जानकारी दी जाएगी। जबकि, कुछ विश्वविद्यालय ऐसे भी हैं, जिन्होंने नियुक्ति के बावजूद छात्रों को जानकारी ही नहीं दी है।

क्या होगा नुकसान??

      आरजीपीवी हाल ही में घोटाले की वजह से सुर्खियों में रही है जिसके कारण आरजीपीवी के कुलपति भी गिरफ्तार हो चुके हैं। अब डिफॉल्टर घोषित होने के बाद विश्वविद्यालय की छवि पर नकारात्मक असर पड़ेगा। प्लेसमेंट के लिए आने वाली कंपनियां इन्हें क्रेडिबल नहीं मानेंगी। साथ ही यहां पढ़ रहे छात्रों को भी आगे कई मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। 

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