एमपी में उलझ सकता है प्रमोशन का मामला, Promotion issue may get entangled in MP.
एमपी में उलझ सकता है प्रमोशन का मामला
मध्य प्रदेश में प्रमोशन के नए नियमों को लेकर मामला उलझ गया है। सरकार ने नए नियम लागू किए हैं, लेकिन पुराने नियमों को चुनौती देने वाली अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस नहीं ली है, जिस पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। 12 अगस्त को इस मामले की सुनवाई होने वाली है, जिससे यह तय होगा कि कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता खुलता है या नहीं।
आइए इस मामले को और विस्तार से समझते हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुराने नियम और हाईकोर्ट का फैसला: साल 2016 में, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2002 के प्रमोशन नियमों को रद्द कर दिया था। इस फैसले में हाईकोर्ट ने पहले से पदोन्नत हुए कर्मचारियों को डिमोट करने का आदेश भी दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: सरकार इस आदेश से सहमत नहीं थी, इसलिए उसने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 'यथास्थिति' बनाए रखने का आदेश दिया, जिसके बाद से राज्य में सभी प्रमोशन रुक गए थे।
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नए नियम और नई चुनौती: जून 2025 में, सरकार ने कर्मचारियों को प्रमोशन देने के लिए नए नियम बनाए और उन्हें लागू कर दिया। लेकिन सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने इन नए नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी।
हाईकोर्ट का सवाल: हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि जब नए नियम बन गए हैं, तो सुप्रीम कोर्ट से पुरानी याचिका वापस क्यों नहीं ली गई?
आगे क्या होगा?
12 अगस्त को जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी। सरकार को इस सवाल का जवाब देना होगा। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का पक्ष यह हो सकता है कि वह सशर्त प्रमोशन दे रही है, जो सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। यह बात नए नियमों में भी साफ तौर पर बताई गई है।
सरकार के जवाब पर ही यह निर्भर करेगा कि प्रमोशन का मामला सुलझ पाता है या नहीं।




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