नगर में लगे गंदगी के अंबार से संक्रामक बीमारियों के फैलने का भय,स्थानीय प्रशासन बेसुध,There is fear of spread of infectious diseases due to the pile of filth in the city, the local administration is unconscious.
नगर में लगे गंदगी के अंबार से संक्रामक बीमारियों के फैलने का है भय स्थानीय प्रशासन बेसुध
पिछले डेढ़ दशक से राजनैतिक कारणों से फुटबॉल बना एवं नगर पंचायत होने की बाठ जोह रहा केसली नगर आज जहां-तहां कूड़े-कचरे के लगे अंबार और सड़कों पर बेतरतीब ढंग से पसरी हुई गंदगी से बेहद परेशान है। यह लाचारी केसली नगर की पहचान सी बन गई है। केसली नगर के कई वार्डों में सड़ांध एवं दुर्गंध के बीच से लोग निकलने को मजबूर हैं । कुछ लोगों को तो ऐसी सड़ांध के बीच अपना जीवन निर्वाह करना पड़ रहा है।
कहां है सबसे ज्यादा गंदगी?
केसली नगर में सबसे प्रदूषित तो वार्ड 08 है, इस वार्ड की सड़क से विभिन्न ग्रामों का संपर्क है लेकिन मजाल है कि इस रोड को एवं यहां जमीं गंदगी को साफ करने पर ध्यान दिया जाए। हां, दो चार माह में एकाध बार सफाई की औपचारिकता जरूर पूरी की जाती है। इस वार्ड में से पूर्व सरपंच रोज उसी सड़ांध के बीच अपने नाकारा समय को याद करते हुए निकलते रहते हैं । दूसरा गंदगी का अंबार MPEB दफ्तर के बाजू से ही है जहां कचरे का अंबार लगा हुआ है बरसात का मौसम चल रहा है। यही स्थिति बनी रही तो लोगों में संक्रामक बीमारी फैलने का भी भय है। फिर खासी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
दिया तले है अंधेरा
केसली नगर में उच्च दायित्वों का निर्वहन करने वाले जनप्रतिनिधियों का भी निवास है लेकिन अपने गृहनगर पर ही वे ध्यान नहीं दे रहे हैं। पूरे भारत में केंद्र सरकार स्वच्छता अभियान चला रही है लेकिन कई हजारों की आबादी वाला यह नगर साफ-सफाई के मामले में बहुत पीछे है। जाहिर है कि केसली पंचायत स्वच्छता के मामले में नगरवासियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रही है।
अंदर आबादी के हैं बुरे हाल
नगर की घनी आबादी वाले भीतरी मुहल्लों का सबसे बुरा हाल है। जहां के लोग कचरे के ढेर, सड़ांध और बदबू के बीच अपना जीवन निर्वाह कर रहे हैं। त्रि स्तरीय पंचायत की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ग्राम पंचायत होती है जिसपर वर्तमान में स्वच्छ भारत अभियान को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी है। लेकिन वह अभी तक कचरा प्रबंधन की समस्या का समाधान ही नहीं कर पाई है। जबकि लगभग दो वर्षों से स्थानीय जनप्रतिनिधि दावा कर रहे हैं, कि कचरा प्रबंधन के लिए उचित व्यवस्था को कर लिया गया है।
एमपीईबी ऑफिस केसली
बेतरतीब फेंका जा रहा कचरा,वार्डों में कूड़ेदान नहींकेसली क्षेत्र की स्थिति यह है कि जहां शासकीय भूमि है वहां पर तो नाडेप से कचरादान बनाए गए हैं लेकिन जिस मोहल्ले में शासकीय भूमि नहीं है वहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है।किसी भी मोहल्ले में पर्याप्त मात्रा में कूड़ेदान उपलब्ध नहीं है। नतीजा यह है कि कूड़े-कचरे को बेतरतीब फेंक दिया जाता है। कचरे का नियमित रूप से उठाव न होने से लगभग सभी माेहल्लों में सफाई की स्थिति बहुत ही बदतर है। चौतरफा कचरे का साम्राज्य है जिसपर लाखों खर्च करने के बाद भी सफाई व्यवस्था कारगर नहीं हुई है, आम नतीजतन लोगों को परेशानी उठाना पड़ रही है।
नाडेप का भी है कुप्रबंधन
नगर में जगह जगह नाडेप (सार्वजनिक कूड़ादान) बनाए गए थे ,जिससे कि लोगों को कचरा यहां वहां ना फेकना पड़े और वे नाडेप का उपयोग करते हुए कचरा एक जगह डालें,लेकिन नाडेप भी कई दिनों तक खाली नहीं किए जाते कचरा उसी में सड़कर दुर्गंध मारने लगता हैं और कई बीमारियों का खतरा भी बनता है।
उठने वाले सवाल
• आखिर कब तक जनप्रतिनिधि कुंभकरणी नींद सोते रहेंगे ?
• केसली नगर सफाई के मामले में पीछे क्यों ?
• डेंगू ,चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का नहीं भय?
• अगर संक्रमण फैला तो जिम्मेदार कौन ?
क्या हो सकते हैं उपाय?
• सर्वप्रथम संपूर्ण नगर में यत्र तत्र कचरा फेंकना प्रतिबंधित हो
• नगर में और कचरा वाहन की व्यवस्था की जाए।
• अपनी निजी जमीन पर भू स्वामी कचरा न डालने दें।
• ऐसा होने पर भू स्वामी पर कार्रवाई का प्रावधान हो, या उसी जमीन पर नाडेप का निर्माण करा दिया जाए।
• बेतरतीब कचरा फेंकने वालों पर शुल्क लगाने की कार्रवाई की जाए।
• और नगर का कचरा नगर से कहीं दूर फेंका जाए।





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