हत्याकांड की 'गूंगी' गवाही,दो ट्रेन में तीन बोरों में मिली थी एक महिला की लाश,हजार किमी के दायरे में बिखरी थी हत्या की गुत्थी,'Dumb' testimony of the murder case,a woman's body was found in three sacks in two trains,the mystery of the murder was scattered within a radius of thousand kilometers.
हत्याकांड की 'गूंगी' गवाही दो ट्रेन में तीन बोरों में मिली थी एक महिला की लाश हजार किमी में बिखरी हत्या की गुत्थी
एमपी में इंदौर पुलिस और उत्तराखंड पुलिस ने मिलकर एक ऐसे केस की गुत्थी सुलझाने की बात कही है जिसमें एक महिला की लाश तीन बोरों में टुकड़ों में बंटी थी और दो अलग अलग ट्रेनों में मिली थी। करीब हजार किमी के दायरे में बिखरी हुई हत्या की इस गुत्थी को सुलझाने में अहम भूमिका उस महिला ने निभाई जो बोल और सुन नहीं सकती ।
क्या कभी कोई गूंगी गवाही भी हो सकती है?
आपने क्या कभी सुना है कि जो बोल व सुन नहीं सकता, वो अदालत जाकर एक सबसे अहम गवाही दे? ऐसा तो शायद फिल्मों में ही देखने को मिला होगा, लेकिन असल जिंदगी में इंदौर में एक केस में ऐसा हुआ जिससे पुलिस को न सिर्फ हत्या की ऐसी गुत्थी सुलझाने में कामयाबी मिली जिसमें लाश टुकड़ों में बंटी थी और कई सौ किलोमीटर के दायरे में बिखरी हुई थी। इंदौर पुलिस के पास एक ऐसा ही गवाह मौजूद है ,जो लाइव मर्डर की इकलौती चश्मदीद थी, मगर वो बोल और सुन नहीं सकती थी सकती थी, इशारे जरूर कर सकती थी, सो उसने किया और अदालत में उसकी गवाही दर्ज हुई, देखते ही देखते उस ब्लाइंड मर्डर की मिस्ट्री का पर्दाफाश हो गया जिसको शायद पुलिस ने भी फाइलों में दफ्न करने का इरादा कर लिया होगा, लेकिन मन बदला और काम भी बन गया।
बात उस उस लाश की है जो टुकड़ों में बंटी और बोरीबंद इंदौर से ऋषिकेश तक जा पहुँची । लेकिन अब इंदौर पुलिस ने टुकड़ों में बंटी उस लाश की पूरी कहानी का पता लगा लिया है।
जनरल बोगी में सीट के नीचे मिली थी बोरी
इसकी शुरुआत हुई 8 जून, शनिवार को इंदौर से नागदा ,महू ,इंदौर पैसेंजर ट्रेन की बोगियों की साफ-सफाई के दौरान एक जनरल बोगी में सीट के नीचे सफाई कर्मी की नजर एक बोरी पर पड़ी। बोरी पर खून के धब्बे दिखे तो इसकी सूचना तुरंत इंदौर जीआरपी को दे दी गई। पुलिसकर्मियों को बोरी की जांच करने पर एक महिला की लाश के टुकड़े मिले। टुकड़े में सिर और धड़ का हिस्सा भर था, हाथ ,पांव गायब थे। मामला स्पष्टतः क़त्ल का था और लाश को ठिकाने लगाया गया था। पुलिस के लिए ये ब्लाइंड मर्डर केस था।
ऋषिकेश में मिले हाथ और पैर
इंदौर पुलिस गुत्थी में उलझी हुई थी और उधर इंदौर से करीब हजार किलोमीटर दूर देवभूमि उत्तराखंड के ऋषिकेश एक्सप्रेस में दो दिन बाद ही एक महिला की लाश के टुकड़े मिले। यहां सिर्फ हाथ और पैर के हिस्से थे। वहां सिर और धड़ गायब था। अब ऋषिकेश पुलिस भी ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी में उलझ गई। पुलिस केस को सुलझाने के लिए पूरे रास्ते को ट्रैक कर रही थी और पहुँच गई वहां से इंदौर। पुलिस को इंदौर पहुँचते ही दो दिन पुरानी बात पता चली जिसमें महिला का सिर और धड़ था।
तीन बोरियों में दो ट्रेनों से मिली एक लाश
पुलिस के लिए दोनों मामलों को एक साथ देखने की वजह सामने आ चुकी थी। लाश के इन टुकड़ों को लेकर दोनों शहरों की जीआरपी की बातचीत शुरू हो गई। पुलिस ने अंदाजा लगाया कि दोनों ट्रेनों में मिले लाश के टुकड़े एक ही महिला के हो सकते हैं। अब पहली कवायद ये थी कि महिला की पहचान कैसे की जाए ?
हाथ पर गुदे नाम से मिला सुराग
पुलिस की नजर महिला के हाथ पर गई जिस पर दो शब्द लिखे थे 'मीरा बेन और गोपाल भाई'। इससे पुलिस को अंदाजा हुआ कि ये मामला गुजरात से तो जुड़ा नहीं है? क्योंकि मध्यप्रदेश और गुजरात के बॉर्डर के आस-पास के कई इलाकों में आमतौर पर आदिवासी लड़कियां अपनी बांह पर अपना और अपने भाई का नाम लिखवाती हैं। आखिरकार पुलिस को महिला की पहचान मिल गई। वो महिला थी 37 साल की मीरा बेन जो रतलाम जिले के बिलपांक थाना इलाके में गांव मऊ की रहने वाली थी। ये भी पता चला कि 6 जून को मीरा बेन अपने पति से झगड़ा कर घर से निकली थी और उसके पति ने अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखवाई थी।
उज्जैन के गिर्द सिमटी जांच
पुलिस का माथा ठनका कि जो महिला घर से सही सलामत निकली वो दो दिन के बाद टुकड़ों में बंटकर बोरियों में कैसे बंद हो गई ? सवाल यही उठा कि मीरा बेन का क़त्ल किसने किया और क्यों? मीरा बेन की लाश को पहचान मिल चुकी थी। अब असली कहानी का पता लगाना था, लिहाजा पुलिस ने मीरा बेन के पति से पूछताछ की तो वहां से उज्जैन का सुराग मिला । मीरा बेन के पति ने खुलासा किया कि वो उज्जैन जाने की बात कहकर घर से निकली थी। पुलिस ने अंदाजा लगाया कि महिला का कत्ल उज्जैन में हुआ हो और क़ातिल ने उज्जैन रेलवे स्टेशन से ही महिला की लाश बोरियों में भरकर अलग-अलग ट्रेनों में रख दिए हों? पुलिस ने अपनी निगाह उज्जैन रेलवे स्टेशन पर टिका दी थीं।
पुलिस को मिला संदिग्ध
पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, रेलवे स्टेशन के आस-पास मुखबिरों की मदद से क़त्ल का राज़ पता लगाने की शुरुआत की। इस कोशिश में पुलिस को कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले, जिसमें 7 जून को मीराबेन एक आदमी के साथ रेलवे स्टेशन से जाती हुई नजर आई। अब ये आदमी कौन है? उसकी पहचान शुरू हुई। मुखबिरों से पता लगा कि वो आदमी कमलेश पटेल है, जो उज्जैन रेलवे स्टेशन के पास ही एक रिहायशी इलाके हीरा मिल की चॉल में रहता था ।उत्तर प्रदेश का रहने वाला कमलेश पटेल पिछले 15 सालों से उज्जैन में ही रहकर कैटरिंग ठेकेदारों के साथ काम कर रहा था।
ट्रेन की जनरल बोगी में मिली लाश के टुकड़ों की सुलझी गुत्थी
मूकबधिर बीवी की गवाही
पुलिस ने 55 साल के कमलेश पटेल को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की, लेकिन कमलेश लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। पुलिस को पता चला कि पटेल शादीशुदा है, लेकिन उसकी बीवी मूक-बधिर, यानी वो सुन और बोल नहीं सकती। मतलब अगर किसी को पटेल के क़त्ल का राज़ पता हो सकता था, तो वो उसकी मूक-बधिर बीवी हो सकती थी। लेकिन दिक्कत ये थी कि पटेल की मूक बधिर बीवी से पुलिस पूछताछ करती, तो कैसे करती? तो पुलिस ने इसका भी हल निकाला। पुलिस ने गूंगों बहरों की बातचीत की भाषा यानी साइन लैंग्वेज के कुछ एक्सपर्ट्स से संपर्क साधा और उन्हें कमलेश पटेल की बीवी से पूछताछ में मदद करने के बुलवा भेजा। एक्सपर्ट्स ने पटेल की बीवी से बात की और तब सामने आई एक ऐसी खौफनाक कहानी, जिस पर यकीन करना भी मुश्किल हो सकता है।
'गूंगी गवाही'
पटेल की बीवी ने इशारों ही इशारों में पुलिस को बताया कि कैसे उसका पति 7 मई को मीरा बेन को अपने साथ घर लेकर आया था। कैसे उसका क़त्ल करने के बाद उसकी लाश के टुकड़े कर डाले। असल में पटेल ने जब मीरा बेन की जान ली, तब पटेल की बीवी घर में नहीं थी, लेकिन जब वो मीरा बेन की लाश के टुकड़े कर रहा था, तब तक उसकी बीवी घर लौट चुकी थी और उसने अपनी आंखों से सबकुछ देखा था यानी पटेल की बीवी की 'गूंगी गवाही' से अब इस बात पता हो चुकी थी कि क़ातिल कोई और नहीं बल्कि कमलेश पटेल ही है। अब बस पुलिस को पटेल से पूरी कहानी तफ्सील से सुननी थी और क़त्ल की वजह से लेकर लाश निपटाने के पूरे सिक्वेंस को समझना था।
झांसे में आ गई थी महिला
अपने पति से झगड़ करके मीरा बेन रतलाम से उज्जैन पहुंची। असल में वो मथुरा जाना चाहती थी। लेकिन मीरा बेन को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो मथुरा जाए तो कैसे? इस बीच रेलवे स्टेशन पर कमलेश पटेल की नजर उस पर पड़ी। पटेल ने उसे अकेला देख कर उससे बात की और हमदर्दी जताई और मथुरा की ट्रेन पकड़ने से पहले उसे अपने साथ अपने घर चलने को कहा,असल में पटेल उसके साथ ज्यादती करना चाहता था। वो पहले भी कई महिलाओं के साथ ऐसा कर चुका था। अपने अंजाम से बेखबर मीराबेन ,कमलेश पटेल के साथ उसके घर चलने को राजी हो गई।
अगले दिन पटेल ने उसके खाने में नींद की गोलियां मिला दी और उसके साथ बलात्कार की कोशिश करने लगा। मगर तभी,इसी दौरान मीराबेन को होश आ गया और उसने अपने साथ हो रही ज्यादती का विरोध शुरू कर दिया और शोर मचाने लगी। गुस्से में आकर कमलेश पटेल ने अपने घर में रखे एक बड़े बोल्ट से मीरा बेन के सिर पर हमला कर दिया। मीरा बेन बेहोश हो गई और रस्सी से गला घोंट कर उसकी जान ले ली। कमलेश जब ये सब कर रहा था तो उसकी बीवी घर में नहीं थी। लेकिन जब तक बीवी घऱ लौटी, तब तक वो एक बड़े से चाकू से मीरा बेन की लाश के टुकड़े करने में लगा था। उसने मीरा बेन की लाश को तीन हिस्सों में बांटा और उसे तीन बोरियों में पैक कर लिया।
सबूत और गवाह भी मिले
वो सबूत मिटाने के लिए उज्जैन रेलवे स्टेशन के यार्ड में पहुंचा। उसने पहली दो बोरियां नागदा, महू, इंदौर पैसेंजर ट्रेन की एक बोगी में रखे। लेकिन तीसरी बोरी रखने से पहले ही ट्रेन चल पड़ी और तीसरी बोरी यानी हाथ और पांव का हिस्सा उसके पास ही रह गया। कई घंटों के बाद उसे तब फिर से ट्रेन में तीसरी बोरी रखने का मौका मिला, जब योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस वहां पहुंची। इस बोरी में कटे हुए हाथ पांव थे, जो दो दिन बाद ऋषिकेश रेलवे पुलिस को मिले थे। क़ातिल ने लाश के टुकड़े अलग-अलग ट्रेनों की बोगियों में इसलिए नहीं रखे थे कि इस मामले में पुलिस को गुमराह कर सके बल्कि मजबूरन दो बोरियों के रखते ही एक पहली ट्रेन रवाना हो गई,जिसके चलते उसे तीसरी बोरी को दूसरी ट्रेन में रखनी पड़ी।
अब पुलिस ने इस केस को सुलझा लिया है और क़ातिल की निशानदेही पर उसके घर से महिला के कपड़े,घड़ी, चप्पल, मोबाइल की बैटरी जैसी चीज़ें बरामद कर ली गई हैं। पुलिस की कार्रवाई जारी है।



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