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रेजिडेंट डॉक्टरों का हल्लाबोल: स्टाइपेंड संशोधन न होने पर, OPD व OT सेवाएं ठप करने की चेतावनी, Resident doctors protest: Threaten to halt OPD and OT services if stipend is not revised.

MP में रेजिडेंट डॉक्टरों का हल्लाबोल: स्टाइपेंड संशोधन न होने पर 'जस्टिस मार्च', OPD व OT सेवाएं ठप करने की चेतावनी

Source:Social Media (सांकेतिक)

भोपाल(मप्र)- मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर प्रदेश के करीब 8,000 रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न लामबंद हो गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो ओपीडी (OPD) और इलेक्टिव ऑपरेशन थिएटर (OT) का काम पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

मुख्य बिंदु: क्यों नाराज हैं डॉक्टर?

 • आदेश की अनदेखी: 7 जून 2021 के सरकारी आदेश के अनुसार, CPI (Consumer Price Index) आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था।

 • एरियर का भुगतान: डॉक्टरों की मांग है कि बढ़ा हुआ स्टाइपेंड लागू करने के साथ-साथ अप्रैल 2025 से अब तक का बकाया (Arrears) भी तुरंत दिया जाए।

 • प्रतीकात्मक विरोध: पिछले दो दिनों से डॉक्टर काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं।

रविवार को 'जस्टिस मार्च', सोमवार से इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार

JDA के नेतृत्व में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। डॉक्टरों ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है:

1. 'जस्टिस मार्च'

रविवार को प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेज परिसरों में रेजिडेंट डॉक्टर शांतिपूर्ण तरीके से 'जस्टिस मार्च' निकाला गया। इस रैली का उद्देश्य सरकार और जनता का ध्यान अपनी जायज मांगों की ओर खींचना था।

2. सोमवार से OPD और सामान्य सर्जरी बंद

यदि रविवार शाम तक शासन की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तो सोमवार से डॉक्टर इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार करेंगे। इसका सीधा असर हर्निया, पथरी और रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशनों पर पड़ेगा, जिससे मरीजों की वेटिंग लिस्ट बढ़ सकती है।

3. इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी जारी

राहत की बात यह है कि डॉक्टरों ने मानवीय आधार पर आपातकालीन (Emergency) सेवाओं को चालू रखने का निर्णय लिया है। अति गंभीर मरीजों का उपचार बाधित नहीं किया जाएगा।

शासन के पुराने आदेश का हवाला

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि वे किसी नई सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल उस आदेश का क्रियान्वयन चाहते हैं जो शासन ने खुद 7 जून 2021 को जारी किया था। बार-बार निवेदन और ज्ञापनों के बावजूद विभाग द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से डॉक्टरों में भारी आक्रोश है।

मरीजों पर पड़ेगा सीधा असर

प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में हर दिन हजारों की संख्या में मरीज दूर-दराज से इलाज कराने आते हैं। सोमवार से शुरू होने वाली हड़ताल के कारण ओपीडी में लंबी कतारें लग सकती हैं और पहले से तय (Scheduled) ऑपरेशन टल सकते हैं।

स्वास्थ्य संकट

अब सबकी नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या शासन समय रहते डॉक्टरों की मांगें मानकर इस संभावित स्वास्थ्य संकट को टाल पाएगा?

"हम मरीजों को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन हमारे धैर्य की परीक्षा ली जा रही है। अगर सरकार 2021 के अपने ही आदेश को लागू नहीं कर सकती, तो हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।" — प्रतिनिधि, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA)

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