सागर जिले की देवरी में “खाली कुर्सी बनाम भरी कुर्सी” का फैसला भरी कुर्सी ने दर्ज की बड़ी जीत,In Deori of Sagar district, the decision of “empty chair vs. filled chair” was decided and the filled chair registered a big victory.
सागर जिले की देवरी में “खाली कुर्सी बनाम भरी कुर्सी” का फैसला भरी कुर्सी ने दर्ज की बड़ी जीत
देवरी में प्रतीकात्मक मुकाबले ने खींचा लोगों का ध्यान, राजनीतिक संकेतों से भरा रहा यह अनोखा फैसला
सागर(मप्र)- जिले के देवरी क्षेत्र में “खाली कुर्सी बनाम भरी कुर्सी” को लेकर हुई चुनावी घोषणा ने स्थानीय राजनीति और आम जनचर्चा में खासा उत्साह पैदा कर दिया था। इस अनोखे और प्रतीकात्मक फैसले में भरी कुर्सी (नेहा अलकेश जैन) ने खाली कुर्सी को करीब 1200 मतों से पराजित कर दिया, जिसे लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
समर्थकों में उत्साह का माहौल
भरी कुर्सी की जीत की खबर सुनते ही नेहा अलकेश जैन के समर्थकों में भारी उत्साह का माहौल देखा गया क्योंकि इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर लड़ा गया था।
पहले रूझान से ही थी भरी कुर्सी आगे
देवरी नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए 13 हजार 337 मतदाताओं ने वोट डाले थे, सागर जिले की देवरी नगर पालिका के अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के लिए 19 जनवरी को हुए मतदान के बाद बुधवार को मतगणना हुई। देवरी के शासकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मतगणना हुई। सीसीटीवी कैमरों और पुलिस बल से निगरानी मतगणना की गई।शुरुआती रूझान से ही भरी कुर्सी आगे रही। पहले राउंड में भरी कुर्सी (नेहा अलकेश जैन) को 4036 वोट मिली । वहीं खाली कुर्सी को 3130 वोट मिले। इस प्रकार भरी कुर्सी 906 वोटों से आगे हुई और बढ़त को बढ़ाते हुए करीब 1200 वोटों से जीत दर्ज की।
पार्षदों के अविश्वास प्रसाव के बाद हुए चुनाव
दरअसल, देवरी नगर पालिका की अध्यक्ष नेहा अलकेश जैन के अध्यक्ष बनने के कुछ समय बाद ही उनका विरोध शुरू हो गया। पार्षदों के विरोध के चलते उन्हें पद से हटा दिया गया था। लेकिन वे कोर्ट से स्टे लेकर आईं और दोबारा अध्यक्ष पद का प्रभार संभाला।
भाजपा से हुईं थीं निष्कासित
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने अध्यक्ष नेहा जैन और उनके पति अलकेश जैन को पार्टी की सदस्यतता से 6 साल के निष्कासित कर दिया था। पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने देवरी नगर पालिका के अध्यक्ष को पद पर वापस बुलाने के लिए खाली कुर्सी और भरी कुर्सी के चुनाव की घोषणा की थी।
विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएं तेज
देवरी में यह फैसला ऐसे समय पर सामने आया है जब क्षेत्र में नेतृत्व, जिम्मेदारी और जनभागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चाएं तेज हैं। खाली कुर्सी को जहां निष्क्रियता, अनुपस्थिति और जिम्मेदारी से दूरी का प्रतीक माना गया, वहीं भरी कुर्सी को सक्रियता, उपस्थिति और निर्णय क्षमता का संकेत बताया गया। इसी तुलना के आधार पर लोगों ने भरी कुर्सी को अपना समर्थन दिया।
फैसला केवल प्रतीक नहीं संदेश भी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह फैसला केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि जनता अब जवाबदेही और सक्रिय नेतृत्व चाहती है। देवरी के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और जानकारों के अनुसार, यह परिणाम आने वाले समय में क्षेत्र की राजनीतिक दिशा और जनभावनाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
जिले के अन्य हिस्सों में भी चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम ने देवरी ही नहीं, बल्कि सागर जिले के अन्य हिस्सों में भी चर्चा को जन्म दिया है। लोग इसे लोकतंत्र में भागीदारी और जिम्मेदार प्रतिनिधित्व की जीत के रूप में देख रहे हैं।
देवरी में पहले भी हुआ है ऐसा चुनाव
2007 में भी देवरी में खाली कुर्सी भरी कुर्सी का चुनाव हुआ था जिसमें तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष अनिल जैन (अन्नू सिनेमा) ने भरी कुर्सी पर जीत दर्ज की थी।
यह फैसला एक मजबूत संदेश
कुल मिलाकर, देवरी में खाली कुर्सी और भरी कुर्सी के बीच हुआ यह फैसला एक मजबूत संदेश देता है कि जनता अब केवल नाम या प्रतीक नहीं, बल्कि काम करने वाली कुर्सी को ही स्वीकार करेगी।





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