‘महामस्तकाभिषेक दिवस’,"भक्ति और समरसता का अद्भुत आयोजन",‘Mahamastakabhisheka Day’, “A wonderful event of devotion and harmony”
‘महामस्तकाभिषेक दिवस’ "भक्ति और समरसता का अद्भुत आयोजन"
केसली(सागर)।“निज अंतर की ओर जाने का भाव मोक्ष महल की प्रथम सीढ़ी है”—मुनि श्री के इन अमृत वचनों के साथ आज प्रातः 7 बजे 1008 श्री चंद्रप्रभ दिगंबर गोलापूर्व जैन मंदिर में नवीन प्रतिष्ठित जिन-प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा ससंघ सम्पन्न हुई। इसी क्रम में आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर एवं बीच के मंदिर में भी ध्वज व कलशारोहण संपन्न हुआ।
नियंत्रण ही उत्कृष्ट अहिंसा है
कार्यक्रम के दौरान मुनि श्री महासागर जी ने कहा कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है और दिगंबर मुनि मार्ग ही आत्मकल्याण का साक्षात् मार्ग है। उन्होंने बताया कि घमंड, क्रोध, माया और लोभ पर नियंत्रण ही उत्कृष्ट अहिंसा है। मुनि श्री ने प्रत्येक जीव की समानता पर बल देते हुए कहा कि छोटा-बड़ा का भेद ही सभी विसंगतियों का कारण है। मुनि श्री ने 23 नवंबर को वार्षिक “महामस्तकाभिषेक दिवस” घोषित किया।
नियमावली व न्यास प्रणाली का पालन आवश्यक
- “केसली में अद्वितीय आध्यात्मिक क्षण: नवीन जिनप्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक सम्पन्न”
- “मुनि श्री के सानिध्य में केसली दिगंबर जैन समाज का ऐतिहासिक महामस्तकाभिषेक”
- “23 नवंबर बना ‘महामस्तकाभिषेक दिवस’—केसली में भक्ति और समरसता का अद्भुत आयोजन”
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